प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे अमेरिका का दौरा, तालिबान पर चर्चा की संभावना

आईआईएमटी न्यूज़ डेस्क, ग्रेटर नोएडा



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के आखिरी में अमेरिका का दौरा कर सकते है। तालिबान की सत्ता समर्थन को लेकर पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से चर्चा करेंगे। खबरों की माने तो पीएम के दौरे की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है जबकि एएनआई के सूत्रों से जानकारी मिली है। बता दें कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 23-24 सितंबर को पीएम का दौरा निर्धारित बताया गया है। दरअसल बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी का पहला अमेरिकी दौरा है, इससे पहले उन्होंने 2019 में यूएस का दौरा किया था। 2019 में पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ह्यूस्टन में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित किया था। बता दें कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य तालिबान के रिश्तों पर चर्चा करने का है। सबसे बड़ी बात है कि मोदी की बाइडन से व्यक्तिगत रूप से पहली मुलाकात है। सूत्रों के मुताबिक यूएनजीए में वाशिंगटन के दौरे के बाद पीएम मोदी हिस्सा लेंगे। ये वार्षिक सत्र 25 सितंबर को होगा, जिसमें पीएम संबोधन करेंगे। भले ही भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य हो लेकिन जज्बे में किसी देश से कम नहीं है। तालिबान कब्जे के बाद अफगानिस्तान की आवाम संकट के घेरे में है। इस मामले को लेकर भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मुद्दा बना सकता है। जानकारी के मुताबिक 76वें सत्र की चर्चा में पीएम मुख्य अतिथि के बतौर पर पहुंचेंगे। इस सत्र में मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद अध्यक्ष होंगे। बता दें कि 21 सितंबर से आम चर्चा शुरू हो जाएगी। इस सत्र को पीएम मोदी और जो बाइडन मिलकर संबोधित करेंगे। जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलियाई नेता स्कॉट मॉरिसन भी 24 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से आम चर्चा को संबोधित करने के लिए सूचीबद्ध हैं।
पिछले साल ऑनलाइन सत्र को संबोधित किया गया था। इस साल जनवरी में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी का यह पहला अमेरिकी दौरा होगा। इससे पहले वर्चुअल रूप से दोनों नेताओं के बीच QUAD और जी-7 बैठकों में मुलाकात हो चुकी है। भारत और अमेरिका, अफगानिस्तान में पाकिस्तान के कदमों पर करीबी नजर रख रहे हैं। विदेश सचिव ने वाशिंगटन की यात्रा के बाद बताया कि पाक की हर करतूत पर भारत की पेनी नजर बनी हुई है। उन्होंने अफगानिस्तान के हालात में अमेरिका की रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि इंतजार करो और देखो की नीति यूएस और भारत अपनाएगा।