कोरोना की मां

डॉ वेद व्यथित
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मैंने अपने मित्र भाई भरोसे लाला को उस की कुशल क्षेम जानने केलिए फोन किया तो घर परिवार की हाल- चाल जानने के बाद भारतीय सामजिकता के अनुसार पूछ लिया कि अडोसी पड़ोसी ठीक हैं। तो उन्होंने बहुत ही गंम्भीर हो कर बताया कि वैसे तो सब ठीक ही है पर चाची रामकली बहुत उदास दिख रही है। कहीं मर न जाये। तो स्वाभाविक मैंने पूछा कि कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो गया। वे तो बेचारी बहुत ही अच्छी है। हमेशा अनजान आदमियों से भी राजी ख़ुशी जान लेती हैं। किसी के दुःख सुख में शामिल होना उन को ख़ुशी देता है। वे सब को अपना मान कर ही स्नेह से घर गृहस्थी का हाल चाल पूछ लेती हैं तो उन्हें क्या हो गया। वे ठीक रहनी चाहियें। कहीं कोरोना की बीमारी न तो नहीं पकड़ लिया।
तब मेरे मित्र ने बताया कि उन्हें कोरोना ने तो नहीं पकड़ा है परन्तु लगता है कोरोना की माँ ने शायद जरूर पकड़ लिया है। करवा तो उन का कुछ नहीं बिगाड़ सकता है क्योंकि हम ने उन्हें पता नहीं कितने सालों से ऐसा ही देखा है। परन्तु करोना की माँ का नाम सुन कर मेरे भी कान खड़े हो गए। मैं एकाएक चौंक गया कि हे भगवान अभी तो हम कोरोना से ही नहीं जीत पाए हैं। अभी तो उस का भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए हैं। यानि अभी तो कोरोना ही खत्म नहीं हुआ है पर पता नहीं यह कोरोना की माँ कौन सी नई बीमारी आ गई। चीन ने तो दुनिया में कोरोना भेजा है पर पता नहीं चलता कहीं चीन से तो कोरोना के साथ उस की माँ को भी भेज दिया है। हे भगवान अब हमारा क्या होगा ? यहां तो पहले ही लोग अस्पतालों में मर रहे हैं। और जो वहां नहीं मर सके वे सड़कों पर पटरियों आदि जगहों पर मर रहे हैं और अब यह नई बीमारी कोरोना की माँ भी आ टपकी है।
यहां तो पहले ही मजदूर पटरियों पर मर रहे हैं। घर जाने के लिए कोई भी जुगाड़ कर रहे हैं। रास्ते में लूटे जा रहे हैं, डंडे खा रहे हैं। हजारों हजारों किलोमीटर सर पर बोझरख कर बच्चों को गोद में उठा कर दिन-रात भूखे प्यासे ही चले जा रहे हैं। मजदूर ही नहीं व्यापारी भी परेशान हैं, कर्मचारी भी परेशान हैं छोटे मोटे दूकानदार भी परेशान पर हाँ इस में जो बिलकुल भी परेशान नहीं दिख रहा है वह है नेता ,जिसे कोई परेशानी नहीं दिख रही है .उन में न तो किसी को कोरोना हुआ है कोरोना तो दूर कोरोना के बीबी बच्चे यानि खांसी जुकाम तक नहीं हुआ है और जो पहले जबरदस्ती जलसा जलूस में खांस ते थे अब तो वे भी नेता बनने के बाद खांसे ही नहीं है खाँसना तो दूर अब उन्हें छींक तक नहीं आई है। चलो छींक और खांसी को तो छोड़ो पर जो उन की उल्टा चलने की और अपनी जिद्द करने की बीमारी थी अब तो वह भी ख़त्म हो गई लगती है। पर इन नेताओं को छोड़ कर बाकी सब परेशान हैं । बाकि बचे लोगों में, मैं, आप और चाची रामकली भी तो हैं। पर चाची रामकली का कौन सा बिजनेस ठप्प हो रहा है या उन्हें भला कोई नौकरी से निकलने का डर थोड़ी है उन की न तो कोई नौकरी है जो इस बीमारी के कारण चली जाएगी। और न ही उन्हें कोई घाटा होने वाला है उन के लिए तो मोहल्ले में ही दो रोटियों की कोई कमी नहीं है। पर भाई यह कोरोना की माँ तो मुझे कोई नई बीमारी लग रही है। भाई पर मैंने तो अभी तक इस के बारे में सुना भी नहीं है आप से ही पहली बार सुन रहा हूँ .न तो किसी अखबार में इस पर कोई समाचार या लेख छपा है और न ही विदेशों से चुराई गई कोई रिपोर्ट ही है और न ही टी.वी पर ही कोई समाचार आया है अभी तक तो , चलो समाचारों और टी.वी चैनलों को तो छोड़ो यह कोरोना की माँ जैसी कोई बीमारी तो अभी किसी सोशल मिडिया पर भी दिखाई नहीं दी है क्योंकि जो खबर बेशक बड़ी- बड़ी समाचार एजेंसियों पर नहीं होती है या टेलीविजन या अखबारों में भी नहीं होती है या खबर होती भी नहीं है तो भी सोशल मीडिया पर तो कहीं न कहीं से आ ही जाती है और खबर बेशक न भी हो तो भी खबर बना ली जाती है और पूरे ब्रह्माण्ड में कुछ ही क्षणों में फ़ैल जाती है .परन्तु भाई भरोसे लाल मुझे बड़ा आश्चर्य है कि मैने भी तक इस कोरोना की माँ के बारे में कहीं से भी कुछ न तो सुना है और न ही पढ़ा है। पर आप को पता नहीं कहाँ से मालूम चल गया है इस कोरोना की माँ का क्योंकि मैं भी उन्ही व्हाट्सअप ग्रुपस में हूँ जिनमें आप हैं और सुबह उठते ही मैं भी आप की ही तरह उन्हें रोज भजन पूजा की तरह देखता हूँ। जिन्हे आप देखते हैं।
मेरे मित्र ने भी मेरी हाँ में हाँ मिलाई की आप ठीक कह रहे हैं बिलकुल नहीं सुना होगा पर मैं आप से पहेली नहीं पूछूंगा सीधे सीधे बता देता हूँ कि कोरोना को दूर करने के लिए अभी कोई दवा तो बनी नहीं है मुझे भी उन की हाँ में हाँ मिलानी पड़ी फिर वे बोले आप को पता ही है कि कोरोना को दूर करने के लिए सब से जरूरी क्या चीज है जिस का दुनिया पालन कर रही है यह आप को पता होगा तो भी आप बता नहीं पाएँगे। क्योंकि हमारे यहां बहुत सी चीजों को उन के असली नाम से नहीं जानते हैं, या उन के असली नाम लेते नहीं है या फिर उन के अंग्रेजी नामों से काम चला लेते हैं। और गंदी चीजों के तो हम असली नाम लेते ही नहीं हैं। जैसे हम कहते हैं कि फ्रेस हो आऊं पर आप जाते कहाँ है यह बात दूसरी है।
ऐसे ही भाई कोरोना की माँ भी है सोशल डिस्टेंसिंग बताओ है या नहीं। मुझे भी उन में हाँ मिलानी पड़ी कि हाँ भाई करोना को दूर रखने के लिए हम सब को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए पर हम इसे सामाजिक दूरी नहीं कहते हैं क्योंकि इस से आपसी दूरी बढ़ने का खतरा है तो बस यही है कोरोना की माँ क्योंकि यह कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है। मैंने पूछा वो कैसे ? तो उन्होंने बताया कि आप को सोशल डिस्टेंसिंग का तो पता ही है जिस के कारण लोग अपने अपने घरों में ही कैद हैं न तो कोई किसी के घर जा रहा है और न ही किसी को अपने घर बुला रहा है तो क्या यह जेल जैसी सजा नहीं है, और और ख़ास कर चाची राम कली के लिए तो यह जैसे भी एक बड़ी सजा की तरह है। तुम तो उन्हें जानते ही हो कि वे बिना बतियाये तो रह ही नहीं सकतीं हैं और जब तक दो चार घरों में जा कर बहुओं के समाचार उन की सास से न जान ले तब तक उन की रोटी ही हजम नहीं होती हैं। उन की रोटियों को हजम करने की अभी तक दुनिया में कोई चूर्ण आंवला, हरड़ या दवा बनी ही नहीं है। बस उन के लिए एक ही दवा काम करती है और वह है उन का सब से हाल चाल लेना। सब की कुशल का मंगल पूछना।
यदि उन्हें कोई दो दिन दिखाई नहीं देता है तो वे उस के लिए परेशान हो जातीं हैं। उन्हें चिंता होने लगती है और फिर वे तुरंत उस के घर हालचाल जानने पहुँच जातीं है कि उन्हे फ़िक्र हो रही थी कि भैया कई दिन से दिखाई नहीं दिए या पड़ोसन की बहू कई दिन से दिखाई नहीं दी। कई दिन हो गए न तो राम राम करने आई और न ही दिखाई दी। सब ठीक तो है मैंने सोचा चलूँ ,हाल-चाल ही पूछ आऊं, और फिर बस हो गया नाश्ता पानी ,दोपहर का भोजन और दोपहर बाद की चाय का इंतजाम।
इसी लिए लोग उन्हें समय समय पर अपने हालचाल खुद ही बताने चली आते थे और समय से राम राम करना नहीं भूलते हैं। क्योंकि चाची रामकली को राम राम का एक तरह का नशा सा है और वे बुजुर्ग होने के नाते इस के लिए अपना अधिकार भी समझतीं हैं। और यदि कोई गली मोहल्ले का कोई बालक जाने अनजाने भला चाची रामकली से बिना राम राम किये भला निकल गया तो उस की खैर नहीं उस की ही नहीं उस के घरवालों को भी वे आड़े हाथों लेना नहीं भूलतीं। यदि बालक उन के हाथ आ गया तो उसे खूब सुनाये बिना नहीं रहतीं .कि तेरे माँ बाप ने तुझे कुछ नहीं सिखाया कि बड़ों को राम राम भी नहीं करना जनता है। क्या तुझे स्कूल में यही पढ़ाते हैं और न जाने क्या-क्या कहतीं रहती। .बेशक वह गलती मान ले तो भी आसानी से नहीं छोड़तीं हैं। उस बेचारे को पीछा छुड़ाना भारी हो जाता है। और यदि उस के घरवाले मिल जाएँ तो चाची राम कली उन की भी ऐसी ही खिचाई किये बिना भला कहाँ मानती कि बच्चों को यही संस्कार दे रहे हो कि किसी से राम राम भी न करो उन्हें स्कूल में इसी लिए भेजते हो क्या.अपना पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हो जब बिगड़ना ही है तो वैसे ही बिगाड़ लो पैसा तो खराब नहीं होगा और फिर इतना ही नहीं बालक के बाप तक को नहीं छोड़ती .,कि तेरा बाप तो ऐसा नहीं था उस ने तो तुझे कैसे संस्कार दिए हैं कि तू तो बेशक पोते पोतियां का हो गया है फिर भी राम-राम किए बिना नहीं रहता है।
इतना ही नहीं मोहल्ले में कोई भी शादी समारोह या जन्मदिन दावत या कुछ भी हो वह बिना चाची रामकली के हो ही नहीं सकता है। वे स्वयं ही उस में आमंत्रित हो जातीं है। कोई बुलैया न बुलाये पर चाची राम कली खुद ही वहां पहुँच जातीं हैं और साथ ही खरी-खरी सुनाये बिना भी पीछे नही रहतीं हैं। वे मोहल्ले की बुजुर्ग होने का अपना पूरा फर्ज निभाए बिना नहीं रह सकतीं हैं।
चाची रामकली बुजुर्ग तो हैं ही और मोहल्ले के लिए महत्वपूर्ण भी हैं। इसी लिए भी उन्हें बहुत से अधिकार अपने आप प्राप्त कर रखे हैं। वे बुजुर्ग होने के नाते अपने अधिकारों का प्रयोग भी खूब करतीं हैं .कोई नई बहू यदि उन के पल्ले पड़ जाए तो बस फिर क्या है उसे प्रेम पूर्वक ऐसी- ऐसी गालियां सुनाती कि बहू भी मन ही मन गाली खा कर खुश होती रहती है । वे बड़ी उम्र में भी ज़िंदा दिल हैं पर अंदर से बहुत ही दयालु और सरल हृदय भी हैं। इसी लिए ना बहुएं उनकी मीठी मीठी गालियां खा कर भी बहुत ख़ुश होती रहती हैं।
परन्तु करोना की माँ सोशल डिस्टेंनसिंग ने चाची राम कली के जीवन को एकदम उदास कर दिया है. अब न तो कोई पहले जैसे राम करने आता है जिस से वे घंटा आधा घंटा आराम से बतिया ले, और न ही वे अब किसी के घर जा पाती हैं जिस से उन को अलग अलग घरों में बने व्यंजनों का स्वाद मिल सके। और नहीं सासों के द्वारा बहुओं के कारनामे ही सुनने को मिल रहें हैं। इसी लिए बेचारी चाची राम कली को कहीं कोरोना की माँ सोशल डिस्टेंसिंग कुछ कर न दे। यह डिस्टेंसिंग जरूर चाची रामकली के लिए भारी पड़ रहां है। कहीं यह चाची रामकली को ले कर चल न दे। करोना को तो देख लेगी चाची राम काली पर उस की माँ से निपटना बड़ा मुश्किल हो रहा है।