राममंदिर निर्माण कार्य में तेजी, 2023 में गर्भगृह में विराजमान होंगे रामलला

आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



राममंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलापूजन किया था, वहीं से मंदिर निर्माण की नींव रखने के बाद कार्य शुरू हो गया था। बता दें कि अक्टूबर 2021 में नींव का कार्य पूरे होने की उम्मीद है। राममंदिर ट्रस्ट का कहना है कि 2023 तक रामलला को गर्भगृह में विराजमान करने की संभवना है। ऊपरी तलों का कार्य 2024 तक सम्पन्न हो जाएगा। मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या नगरी का सौंदर्यकरण भी दोगुना रफ्तार से हो रहा है। आज की तारीख में वहां पर जमीन के दामों में काफी उछाल देखने को मिल रहा है। बता दें कि रामलला मंदिर निर्माण से जुड़ी अहम जानकारी व आकंड़े सामने आए है। मंदिर का विवाद बीते 70 वर्षों से कानून के संग्रहित में आया है। 1950 में पहली बार फैजाबाद की जिला अदालत में मंदिर की याचिका दायर हुई थी। 9 नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने श्रीरामजन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया था। 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने शिलापूजन किया था। मंदिर प्रागंण में कुल जमींन 107 एकड़ निर्धारित की गई, जबकि मुख्य मंदिर(गर्भग्रह) के लिए 2.77 एकड़ शामिल है। वहीं बिल्टप एरिया 57,400 वर्ग फीट, मंदिर की ऊंचाई 161 फीट, मंदिर की चौड़ाई 235 फीट औऱ लंबाई 360 फीट निर्धारित है। प्रथम तल में 132 खंभे, दूसरे तल में 74 और ग्राउंड तल में 160 खंभे होंगे। मंदिर का संपूर्ण खर्च 11,00 करोड़ रुपए है जिसमें मुख्य मंदिर का खर्च 300-400 करोड़ के लगभग होगा। 2021 के अक्टूबर महीने तक नींव का निर्माण पूरा हो जाएगा, वहीं 2022 तक पत्थर लगाने का कार्य होने के बाद 2023 में रामलला गर्भगृह में विराजमान होंगे। 2024 तक मंदिर का निर्माण कार्य सम्पन्न हो जाएगा। 2025 तक छोटे-पूरे कार्य भी पूरे हो जाएंगे। गर्भगृह की लंबाई चौड़ाई 20 फीट होगी। 1000 भक्तों के खड़े होने की पर्याप्त जगह होगी। उत्तर दिशा में पुराना आनंद भवन, कौशल्या भवन, सुमित्रा भवन, सुंदर भवन, सीता रसोई और कैकई भवन का नवीनीकरण होगा। पूर्व में लवकुश मंदिर, राम कचहरी, मानस भवन, श्रंगार भवन औऱ पुराना शीश महल होगा। श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट के पास 107 एकड़ भूमि पर मालिकाना हक है। रामलला मंदिर से 200-300 मीटर की दूरी पर स्थित मंदिरों को ट्रस्ट खरीद रहा है। बागवानी के लिए 180 बिसवा जमीन निर्धारित की गई है। पावन नगरी अयोध्या में मंदिरों की संख्या 8,000 से अधिक है। रामलला से 500 मीटर के दायरे में 150 मंदिर है जबकि 200 मीटर की दूरी में 15 प्राचीन मंदिर पड़ते है। बता दें कि मंदिर से 3 किमी के दायरे में 2,000 बस्तियां है जिनमें 20,000 लोग निवास करते है। राम मंदिर से 1 किमी की दूरी को रामकोट के नाम से जानते है। रामकोट के मुख्य रास्तों में हरिद्वारी पट्टी, सागरिया पट्टी, वसंतिया पट्टी और उज्जैनियां पट्टी है। यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सड़कों का नवीनीकरण किया जा रहा है। 13 किमी मुख्य सड़क को चौड़ा करने के लिए 362 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। वहीं सुग्रीव किला से राममंदिर तक सड़क का दुरस्तीकरण किया जाएगा। जमींन खरीद में बड़ा बदलाव हुआ है, यलो जोन में 3,000 की जगह 10,000 रुपए वर्गफीट के रेट तय किए गए है। रेड जोन की जमींन पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। ट्रस्ट का कहना है कि 20 हजार करोड़ की लागत से अयोध्या का विस्तार और सौंदर्यता बढ़ाने का मॉडल तैयार किया जा रहा है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बस अड्डा, ग्रीन फील्ड टाउन शिप, आश्रम, पर्यटन सुविधा, संग्रहालय, स्कूल और कॉलेज आदि का दुरस्तीकरण व नवीनीकरण किया जा रहा है। बड़े प्रोजेक्ट का रिकॉर्ड 100 वर्ष तक मजबूत रहने का बनाया गया है। अयोध्या को नगर निगम ने अपने सरक्षंण में ले लिया है। बता दें कि मंदिर से स्टेशन की दूरी 1.3 किमी और एयरपोर्ट से 10 किमी है। रेलवे स्टेशन का दो चरणों में आधुनिकी करण किया जाएगा जिसमें 11 क्रॉसिंग लाइन निर्धारित की गई है। केंद्र सरकार ने मंदिर विकास के लिए 250 करोड़ रुपए की धनराशि राज्य सरकार को प्रदान की है। अयोध्या की कुल आबादी 3-4 लाख है। प्रति महीने करीब 12 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते है। सरकार का दावा है कि 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया जाएगा। योगी सरकार ने 84 कोस की परिक्रमा पर भी फोकस किया है। मंदिर का निर्माण कार्य की गति अब तेज कर दी गई है। लक्ष्य के मुताबिक भक्तों की आश सम्पन्न हो सकती है।