गैलीलियो गैलिली आधुनिक विज्ञान के जनक

राहुल तिवारी
आईआईएमटी न्यूज, ग्रेटर नोएडा। गैलीलियो गैलिली को आधुनिक खगोलशास्त्र, भौतिकी और विज्ञान का पिता माना जाता है। उनकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। उनके जैसा वैज्ञानिक बनना आज के युग में बहुत कठिन है। उनका जन्म 15 फरवरी,1564 को इटली के पीसा नामक शहर में हुआ था। उनकी रूचि गणित और दर्शन में काफी था। बिना चिकित्सा की डिग्री हासिल किए बिना उन्होंने अपना शहर छोड़ दिया था। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि वह एक कुशल गणितज्ञ, और दार्शनिक भी थे।



उन्होंने यूरोप की वैज्ञानिक क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके चलते वह आज भी यूरोप में उनका एक बडा नाम है। उन्होंने एक ऐसी दूरबीन बनाई जिससे बहुत दूर की चीज़ों को आसानी से देखा जा सकता था। उन्होंने रात में आकाश का निरीक्षण शुरू कर दिया। दूरबीन की सहायता से लंबे समय तक बृहस्पति ग्रह का लंबे समय तक अध्ययन किया। उन्होंने चार चंद्रमाओं को खोज निकाला, जिन्हें हम गैलीलियन चंद्रमा भी कहते हैं। उन चार चंद्रमाओं का नाम हैं- लो, यूरोपा, गैनीमेड और कैलिस्टो। पृथ्वी के चंद्रमा की सतह समतल नहीं है, इसकी भी जानकारी हमें गैलीलियो गैलिली ने ही दी। यही नहीं सूर्य पर पड़ने वाले काले धब्बों, शुक्र ग्रह की कलाओं और शनि के छल्लों का भी गहरा अध्ययन किया। उन्होनें 1632 में खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अपने अध्ययन पर एक पुस्तक भी लिखी थी। जो विज्ञान के क्षेत्र में बहुत लोगों द्वारा पसंद भी की गई। बड़ी दुख की बात यह रही की वह सन् 1642 में हमेशा के लिए इस दुनिया से हमें छोड़ कर चले गए।