सोशल मीडिया- सुविधा है, जीवन नहीं

धीरज कुमार
समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही बुद्धिमानी होती है परन्तु इससे भी अधिक बुद्धिमानी इसमें होती है कि हम समय की चाल को ठीक से पहचानें और उसके सही या गलत होने का आकलन कर कदम उठाएं। मैं बात कर रहा हूं सोशल मीडिया की जो आज के समय में जीवन का अभिन्न अंग हो गया है। आज लोगों को लगता है कि सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थिति के बिना जीवन अधूरा है। यहां तक कि यदि उनकी किसी पोस्ट को ज्यादा लोगों ने लाइक नहीं किया तो उन्हें अपना होना ही अर्थहीन लगने लगता है। हम अपने होने को सोशल मीडिया से प्रमाणित करने की कोशिश करते हैं परन्तु कभी यह नहीं सोचते कि जब सोशल मीडिया नहीं था तब भी हम हम थे और हमारा होना परिवार- समाज और देश के लिए महत्व रखता था, और आज भी रखता है। आज कोई फिल्म स्टार, नेता, खिलाड़ी या समाज सेवी यदि सोशल मीडिया पर बहुत प्रसिद्ध है तो इसलिए नहीं कि वह उसपर अधिक समय बिताता है बल्कि इसलिए कि वह वास्तविक जीवन में देश व समाज के लिए कहीं अधिक व अर्थपूर्ण कार्य करता है। इसलिए हमें सोशल मीडिया और उसके साथ अपने संबंध को ठीक से देखने और परखने की जरूरत हमेशा रहती है। सबसे बड़ी बात यह कि सोशल मीडिया एक सुविधा है जीवन नहीं।


सोशल मीडिया आज के तकनीक प्रधान समय का मीडिया है यानी कि आज की जरूरत है। मोबाइल और इंटरनेट ने हमारे जीवन को कई नये आयाम दिये हैं जिनमें से एक सोशल मीडिया भी है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया जन-संचार के क्षेत्र में अहम योगदान निभा रहा है। एक तरफ आज हर किसी के पास समय का अभाव है, जिसके कारण परिवार, मित्र या रिश्तेदारों से मिलना मुश्किल हो गया हैं जिससे उनके बीच का दूरी बढ़ गई हैं। दूसरी तरफ सोशल मीडिया ने इस दूरी को मानो खत्म कर दिया हैं। सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका हैं। एक-दूसरे से सम्पर्क के लिए यह सही और सुगम भी है साथ ही समय की भी बचत होती है। सोशल मीडिया से हमें समाचार ही नहीं मिलते बल्कि यह हमारा मनोरंजन करने का माध्यम भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया विश्वस्तरीय माध्यम है जिसके द्वारा कोई अपने विचार आसानी से लोगां तक पहुंचा सकता है या फिर अपनी आवाज बुलंद कर सकता है। इसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं को या अपने किसी उत्पाद को लोकप्रिय भी बना सकता हैं। सोशल मीडीया के प्रमुख प्लेटफार्म फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, यूट्यूब आदि हैं जिनसे हर कोई आसानी से जुड़ सकता हैं।


सोशल मीडिया ने एक तरफ जीवन में कई सुविधाएं जोड़ दी हैं वहीं कई नई समस्याओं को भी जन्म दिया है। सोशल मीडिया पर आजकल के युवा इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके रहन-सहन में भी बदलाव आने लगा हैं। उनके पढ़ाई-लिखाई से भी ध्यान हटने लगा है। यहां तक कि उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी चिंता नहीं रहती है। अपने तमाम फायदों के बावजूद सोशल मीडिया की आदत एक तरह की बीमारी भी बनती जा रही है। हाल ही में अमेरिका में युवाओं से इस लत को छुड़ाने के लिए क्लिनिक तक खोले गये हैं जिसमें उन लोगों को रखा जाता हैं जो इसके आदी हो चुके हैं। वहां पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ श्रम भी कराया जाता है। ऐसे मरीजों को मानसिक तनाव ना हो इसके लिए भरपूर नींद के लिए काफी समय भी दिया जाता हैं। साथ ही व्यायाम भी कराया जाता है। हमारे देश में अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। इधर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर लोगों के साथ धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ रही हैं इसलिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं।



1. सच्चे रहें- सोशल नेटवर्किंग साइट पर सच्चे बने रहने की जरूरत होगी। यहां फर्जी पहचान ज्यादा नहीं टिकेगी और न ही आप फर्जी लोगों के चक्कर में पड़ें। अगर आप इन साइटों से बहुत गहरे नहीं जुड़ेंगे तो यह सिर्फ समय बिताने का जरिया ही बन सकता है। इसलिए आप जब भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर नए लोगों से मिलें तो सच्चे और ईमानदार बने रहें।

2. हर समय और हर जगह नए दोस्त- सोशल मीडिया की सबसे बड़ी बात यह है कि आपको हर समय और हर जगह नए दोस्त मिल जाएंगे। इस पर पूरी दुनिया के लोग आपस में मिल सकते हैं और बातें कर सकते हैं। नये रिश्ते बनाने में दूरियां कभी भी रुकावट नहीं बनतीं पर इस बात का घ्यान रखें कि नए दोस्त कैसे हैं।

3. सोच समझ कर इस्तेमाल करें- सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफी सोच समझकर करना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि आप इसके सारे फीचर्स का प्रभावी इस्तेमाल करें। सोशल मीडिया पर हमें निजी और व्यावसायिक दोनों स्तर पर नये अवसर मिल सकते हैं जिनका फायदा उठाना चाहिए। इस पर हम किसी भी तरह के उत्पाद और सेवाओं की मार्केटिंग कर सकते हैं।

4. सावधान रहें- सोशल मीडिया की यह खासियत है कि हम देश की सीमा से बाहर जाकर एक साथ जुड़ते हैं। पर हां, यहां आप लोगों से बात करने के दौरान थोड़े सतर्क रहें। यह जरूरी नहीं कि आप इस आभासी दुनिया में जिन लोगों के संपर्क में हैं, वे अच्छे ही हों।

5. राजनीतिक का शिकार न बनें- आजकल लोग इसका उपयोग राजनीतिक फायदे के लिए भी करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारे देश में 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव हैं जिसमें राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया था। ऐसे में सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय खुद को राजनीति का शिकार होने से बचाना जरूरी है।

6. नकारात्मक प्रयोग न करें- सोशल मीडिया जितना सरल और सकारात्मक हैं उतना ही नकारात्मक भी। इसके माध्यम सेलोगों के बीच नकारात्मक या समाज विरोधी विचारों को आसानी से फैलाया जा सकता है। हाल ही में भी कुछ असामातिक तत्वों ने इसका प्रयोग करके भारत बंद के दौरान लोगों को भड़काया जिसके कारण कई जगह हिंसा फैली और कई लोग मारे गये।

सोशल मीडिया लोगों को किसी भी मुद्दे पर जागरूक करने का ही काम नहीं करता बल्कि कई बार लोगों को गलत दिशा में मोड़ने का कारण भी बन जाता है। इसके माध्यम से निहित स्वार्थ वाले लोग आम जनता में गलत जानकारियां देकर या किसी भी घटना को गलत परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत कर लोगों को बरगलाने में कामयाब हो जाते हैं जो सामाजिक एकता के लिए बड़ा खतरा है।

7. सूचना की सच्चाई को पहले जानें- सोशल मीडिया की एक बड़ी कमी यह है कि इस पर बहुत से लोग किसी सूचना की सत्यता को जाने बिना उसे अन्य लोगों के साथ साझा कर देते हैं जबकि वे हकीकत में गलत सूचना होती हैं। इस तरह की गलत सूचनाएं कई व्यक्तियों द्वारा बिना उनकी सत्यता जाने साझा करने से लोगों पर गलत असर होता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया आजकल ठगी का साधन भी बन गया है। आये दिन इस तरह की खबरें आती हैं कि युवक या युवती ने फेसबुक या अन्य माध्यम से दोस्ती कर दूसरे को धोखा दिया और उन्हें आर्थिक या शारीरिक क्षति पहुंचायी।