रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज, लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए न केवल हादसे वाली इमारत को ध्वस्त करने का निर्णय लिया है, बल्कि प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच भी शुरू कर दी है।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हादसे की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने भवन के प्रत्येक हिस्से का निरीक्षण किया और आग लगने के कारणों तथा सुरक्षा मानकों की स्थिति की पड़ताल की। जांच दल में आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार और आईएएस अधिकारी अमृत अभिजात शामिल हैं। अधिकारियों ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं, जिनके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कोचिंग भवन में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया था। आपातकालीन निकास मार्ग पर्याप्त नहीं थे और कई सुरक्षा उपकरण या तो काम नहीं कर रहे थे या उपलब्ध ही नहीं थे। प्रशासन का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो जान-माल का नुकसान कम हो सकता था।
हादसे के बाद सबसे मार्मिक दृश्य अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर देखने को मिले। अपने बच्चों की तलाश में पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। एक मां अपनी बेटी का शव देखकर बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला। कई परिवार ऐसे हैं जिनके घरों के इकलौते बेटे या बेटियां इस हादसे का शिकार हो गए। पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार और हादसे की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।
इस बीच राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। लखनऊ हादसे के बाद 20 शहरों में विशेष अभियान चलाकर कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई संस्थानों में अग्निशमन और भवन सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां पाई गईं। नियमों का उल्लंघन करने वाले 33 कोचिंग सेंटरों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार अभियान अभी जारी रहेगा और जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अग्निशमन प्रमाणपत्र, आपातकालीन निकास व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में बड़े शहरों में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन कई स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही है। संकरी गलियों, बहुमंजिला इमारतों और अपर्याप्त निकास व्यवस्था के कारण आपात स्थिति में छात्रों की जान जोखिम में पड़ जाती है। लखनऊ की यह घटना ऐसे संस्थानों के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल फोरेंसिक रिपोर्ट और एसआईटी जांच का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार व्यापक सुरक्षा सुधारों की तैयारी में जुट गई है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

