बालिका दिवस पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को समर्पित

केशवानंद भारती

केशवानंद भारती

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लड़का और लड़कियों को एकसमानता का अधिकार देने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र  की उन महिलाओं पर था जो शिक्षा सरोकार से पिछड़ी हुई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1990 से 2000 के बीच देश में महिलाओं की शिक्षा 33 से 42 फीसदी थी, आधुनिक काल खंड में इस आंकड़े के ग्राफ में इजाफा हुआ है, 2010 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में महिलाओ को शिक्षा पद्धति 56 फीसदी दर्ज की गई जबकि शहरी क्षेत्र में ये आंकड़ा 68 फीसदी पहुंच गया है। 2021 की रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की शिक्षा 62 फीसदी रही और वहीं शहरी क्षेत्र की महिलाओं का ग्राफ 78 फीसदी पहुंच गया। दरअसल इस आंकड़े को अनुमानित रूप से स्पष्ट किया गया है इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती है। 2014 में केंद्र की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंपी गई। पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर बीजेपी ने नारी शक्ति अभियान जारी किया। फिलहाल बालिका दिवस 2008 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद में मनाया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि देश की कई नारी शक्तियों ने महिला प्रतिष्ठा को ऊंचाई के शिखर तक पहुंचाने व महिलाओं में प्रेरित करने व नई ऊर्जा का संचार करने में अहम भूमिका निभाई है। इंदिरा गांधी की विचारधारा बालिकाओ की बालकों से समानता की थी। उन्होंने कहा कि जो काम बालक कर सकता है वहीं कार्य बालिका आसानी से कर सकती है। उनकी सोच बालिकाओं के पिछड़ते भविष्य को सजग बनाने की रही है। इस मुहिम को उन्होंने संपूर्ण देश मे जारी किया। हालिया रिपोर्ट में महिलाओं के रोजगार की विवेचना की गई जिसमें देश के ग्रामीण इलाकों में 28 से 32 फीसदी महिलाएं स्वरोजगार कर रही है, जबकि सरकारी विभाग के अंतर्गत नौकरी करने वाली महिलाओं का आंकडा 22 से 25 फीसदी है। शहरी क्षेत्र  का आंकड़ा देखा जाए तो स्वरोजगार करने वाली महिलाओं का अनुपात 48 से 56 फीसदी है, सरकारी विभाग से संबंधित महिलाओं का अनुपात 42 फीसदी है। इस आंकड़े में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में काफी बड़ी अंतर है, इसका मतलब शिक्षा के क्षेत्र में खामियां। शहरी क्षेत्र में शिक्षा का आयाम विस्तृत है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा अभी भी धरासाही है। अच्छी शिक्षा न मिलने की वजह से महिलाएं पीछे पिछड़ती जा रही हैं। इस आंकड़े को समांतर बनाने के लिए सरकार को शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पर सुधार लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी का लगातार प्रयास महिलाओं को शसक्त बनाने का रहा है। उन्होंने आवास से लेकर राशनकार्ड व अन्य कार्य गृहणी के हाथ में सौपनें का काम किया है। उनकी मुहिम लगातार बेटी बचाओ बेटी पढ़ओं की तरफ प्रयासरत्न है। बेटियों की शिक्षा पर उन्होंने कई लाभ प्रदान किए, इसके साथ शादी अनुदान, महिला पेंशन के अलावा विविध आयामों से जोड़ा है। भारतीय जनता पार्टी की मुहिम की वजह से महिलाओं ने प्रत्येक प्लेटफार्म में  बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। आज आत्मनिर्भरता में महिलाएं किसी से कम नहीं है वो अपने जीवन को बेहतर बनाने की शक्ति जागृत कर रही हैं। बालिका दिवस

लेखक के विचार स्वंय के अध्ययन पर आधारित है, दिए आंकड़ों की अधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती है – मोहित कुमार