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लगातार 9 दिनों तक व्रत रखने से सेहत पर पड़ते हैं ये असर

रोशनी शंकर ( ग्रेटर नोएडा )

शारदीय नवरात्र 2025 का शुभारंभ हो चुका है और पूरे देश में भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह पर्व स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खास माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपवास केवल आस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर को शुद्ध करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका भी है।

वजन और मेटाबॉलिज्म पर असर

नवरात्रि व्रत के दौरान कैलोरी का सेवन सामान्य दिनों की तुलना में कम हो जाता है। इससे शरीर जमा चर्बी को ऊर्जा में बदलना शुरू करता है। यही प्रक्रिया वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाए रखने में सहायक होती है।

पाचन और आंतों को राहत

लगातार भोजन से सक्रिय रहने वाला पाचन तंत्र व्रत के दौरान आराम पाता है। इससे आंतों की सफाई होती है और एसिडिटी व अपच जैसी समस्याओं में कमी आती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे शरीर की “ऑटोफैगी” प्रक्रिया भी कहा जाता है, जिसमें शरीर खुद को रिपेयर करता है।

तनाव घटाता और मन को शांत करता है व्रत

फास्टिंग का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है। कोर्टिसोल (तनाव पैदा करने वाला हार्मोन) का स्तर कम होता है और सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है। इससे मन शांत और सकारात्मक महसूस करता है।

डिटॉक्स और इम्युनिटी बूस्ट

हल्का और सात्विक भोजन लेने से शरीर में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। यह प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है। साथ ही, पाचन पर कम दबाव पड़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है।

व्रत में बरतें सावधानियां

विशेषज्ञों का सुझाव है कि व्रत के दौरान हाइड्रेटेड रहें और केवल साबूदाना व आलू पर निर्भर न हों। फल, दही, कुट्टू और मखाने जैसे पौष्टिक विकल्प शामिल करें। व्रत खोलते समय भारी और तला-भुना भोजन तुरंत न लें, बल्कि धीरे-धीरे सामान्य भोजन की ओर लौटें।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।

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