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दिल्ली SIR 2026: 30 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ, मतदाता सूची को बनाया जाएगा त्रुटिहीन

रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज। राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान 30 जून 2026 से शुरू होने जा रहा है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) 30 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य फर्जी, मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।

निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक अब तक दिल्ली के करीब 42.53 प्रतिशत मतदाताओं, यानी लगभग 62.44 लाख लोगों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। इस प्रक्रिया में वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2002 की मतदाता सूची से किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन मतदाता अब दूसरे स्थान पर जा चुका है या जिनकी जानकारी अपडेट नहीं हुई है। डेटा मैपिंग के बाद अब फिजिकल वेरिफिकेशन का चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें बीएलओ हर घर जाकर जानकारी की पुष्टि करेंगे।

बीएलओ घर-घर पहुंचकर गणना फॉर्म भरेंगे और मतदाताओं की पहचान संबंधी जानकारी का सत्यापन करेंगे। यदि किसी घर पर ताला मिला तो बीएलओ को कम से कम तीन बार वहां जाना होगा। साथ ही वे सूचना पर्ची भी छोड़ेंगे ताकि संबंधित व्यक्ति बाद में संपर्क कर सके। चुनाव आयोग का कहना है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया गया है।

मतदान केंद्रों पर भीड़ कम करने के लिए आयोग ने बूथों का पुनर्गठन भी शुरू कर दिया है। अब एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जाएंगे, जबकि पहले यह संख्या 1500 तक होती थी। आयोग का मानना है कि इससे मतदान के दिन लंबी कतारों में कमी आएगी और लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

इस अभियान की खास बात यह भी है कि पहली बार चुनाव आयोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहा है। वीडियो ट्यूटोरियल के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि वे अपना नाम मतदाता सूची में कैसे खोज सकते हैं और आवश्यक फॉर्म कैसे भर सकते हैं। इससे युवा मतदाताओं और तकनीक का उपयोग करने वाले लोगों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 46 लाख 82 हजार 523 है। आयोग का लक्ष्य 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह त्रुटिहीन मतदाता सूची प्रकाशित करना है। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान से भविष्य में चुनाव प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में माना है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना आवश्यक है। अदालत ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया और एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है।

चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार समेत कई राज्यों में शुरू किए गए इस अभियान से फर्जी और अयोग्य मतदाताओं की पहचान में मदद मिली है। अब दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सके।

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