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सतर्क हो जाइए! अब नहीं ले सकेंगे फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नौकरी।

चारू गर्ग, IIMT न्यूज।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया एक बड़ा फैसला यदि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई सरकारी नौकरी हासिल करता है तो ऐसे नियोजन शुरू होने से ही शून्य मानी जाएगी । कोर्ट का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करता है तो वह  किसी भी सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं ले सकता और ना ही उन पर कोई कानूनी दावा कर सकता है ।
ऐसे व्यक्ति को नियुक्ति  के दिन से लेकर वर्तमान कार्यकाल के दिन तक अपना सारा प्राप्त किया हुआ वेतन वापस करना होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कमलेश कुमार निरंकारी की याचिका पर दिया है। याची बलिया में प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत था एक शिकायत पर जांच के बाद जाली दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने की पुष्टि हुई। याची ने अपने सभी शैक्षिक दस्तावेज जमा किए थे और उसका कहना है कि उसने कोई भी जालसाजी नहीं की लेकिन बिना किसी उचित सुनवाई के  उसकी  नौकरी रद्द कर दी गई ।
उसके दस्तावेजों में पैन कार्ड, आधार कार्ड और शैक्षिक प्रमाणपत्रों में नाम में अंतर था। यह संबंधित प्राधिकारियों की गलती के कारण हुआ था।

सरकार की ओर से कहा गया है कि याची ने जाली मार्कशीट और प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 6 अक्टूबर 2022 के आदेश से उसकी नियुक्ति रद्द कर दी।
उसने एक अन्य व्यक्ति कमलेश कुमार यादव के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। पुलिस की रिपोर्ट में भी यह बात स्पष्ट हुई है की याचिका की ओर से दिए गए पते  पर उसके नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता  है ।

कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त की गई नौकरी शुरू से ही शून्य होती है और ऐसे में विस्तृत जांच की आवश्यकता नहीं होती। याचक को बार-बार मौका देने के बाद भी वह अपने मूल दस्तावेज पेश नहीं कर पाया इसलिए अतः नौकरी रद्द करने और वेतन वापस लेने का आदेश दिया गया।

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