रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज। नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली के एक छह मंजिला होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन और संबंधित विभागों के प्रति भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में यह होटल स्थित है, वह मूल रूप से रिहायशी इलाका है, लेकिन वर्षों से यहां बड़ी संख्या में होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
हादसे के बाद सामने आए दर्दनाक दृश्यों ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से छलांग लगा दी। कुछ लोग धुएं में फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। राहत और बचाव दल ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि होटल के रिसेप्शन पर काम करने वाली एक युवती भी आग की चपेट में आ गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने भावुक होकर कहा, “रिसेप्शन पर लड़की बैठी थी। आग लगने के बाद वह बाहर नहीं निकल सकी। बाद में वह उसी हालत में जली हुई मिली। यह दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।” इस घटना ने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया है।
घटना के बाद आसपास के लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इलाके की संकरी गलियां और अव्यवस्थित निर्माण कार्य पहले से ही चिंता का विषय रहे हैं। आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। लोगों का आरोप है कि यदि भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन निकास व्यवस्था होती तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में होटल, लॉज और गेस्ट हाउस खुल गए हैं। इनमें से कई प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र और अग्निशमन स्वीकृतियां होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि पूरे इलाके में संचालित सभी होटलों की जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों ने मृतकों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
दिल्ली सरकार ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया है। वहीं, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस हादसे को प्रशासनिक विफलता बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर महानगरों में भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्थाओं और अवैध निर्माण के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता, तो शायद 21 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। अब पूरे शहर की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

