ओमिक्रोन ही नाम क्यों पड़ा नए कोरोना वेरिएंट का

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अनुष्का वर्मा। कोरोना वायरस के कई रूप सामने आ चुके है, जिसमें डेल्टा का नाम आपने सबसे ज्यादा सुना होगा। इसके अलावा अल्फा, बीटा और ऐसे ही कई वेरिएंट सामने आ चुके हैं। आइए जानते हैं इन वेरिएंट्स का नामकरण कैसे होता है और वहीं ओमिक्रोन 15वां वेरिएंट भी आ चुका है।
वायरस अपना स्वरूप बदलते रहते हैं, जिसके कारण उनके नए-नए वेरिएंट बनते रहते हैं। आमतौर पर नए स्ट्रेन या वेरिएंट के काम करने के तरीके में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आता। बता दें कि एक बार होस्ट यानी किसी शरीर में पहुंचने के बाद वायरस अपने तेजी से अपने आरएनए की कॉपी बनाने लगता है तो उसकी संख्या बढने लगती है। वहीं कई बार जब वायरस अपनी संख्या बढ़ा रहा होता है तो उसमें गलती से या रेंडमली आरएनए के कॉपी मे गड़बड़ी आ जाती है तो इसे ही वैज्ञानिक म्यूटेशन कहा जाता हैं। इसके कारण उसका स्वरूप बदल जाता है और एक नया स्ट्रेन सामने आ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस नए वेरिएंट को लेकर चिंता जताई है कि और इसे तकनीकि शब्दावली में वेरिएंट ऑफ कंसर्न यानी ‘चिंता वाला वारिएंट’ बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि इस म्यूटेशन के चलते संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और यह काफी तेजी से और बड़ी संख्या मे म्यूटेट होने वाला वेरिएंट है।


वायरस का समय के साथ म्यूटेंट होना सामान्य बात है लेकिन यह तब चिंताजनक हो जाता है, जब वह तेजी से फैलने लगे, नुकसान पहुंचाने लगे और वेक्सीन की प्रभावशीलता से बाहर हो जाए। बता दें कि इस वेरिएंट की जानकारी डब्लूएचओ ने ही पहली बार 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से मिली थी।


वैज्ञानिकों ने ओमीक्रॉन वेरिएंट से तीसरी लहर के आने की आशंका जताई है। हालांकि इस पर अभी अध्ययन होना बाकी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह वेरिएंट डेल्टा से 7 गुना ज्यादा तेजी से फैल रहा है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलने का प्रसार भी डेल्टा के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है। वहीं पहचान हो जाने से पहले ही यह वेरिएंट 32 बार म्यूटेट हो चुका है। खबरों के अनुसार, भारत से फिलहाल इस वेरिएंट वाले किसी मामले की पुष्टि नही की है।

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