एशियाई देशों के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, चीन-पाक को बनाया निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की वार्षिक शिखर बैठक को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। आपको ज्ञात हो कि आज पीएम मोदी का जन्म दिवस भी है, इस अवसर पर सभी एशियाई देशों ने पीएम को बधाई दी। आयोजित सम्मेलन में तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने अध्यक्षता की। पीएम के इस संबोधन में अफगानिस्तान के हालात स्पष्ट हुए साथ ही पाक औऱ चीन को करारा जबाव भी मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत मध्य एशिया के संबंध को बेहतर बनाने में सक्षम है। भू-आबद्ध मध्य एशियाई देश भारतीय बाजारों से जुड़कर लाभान्वित हो सकते है। ईरान के चाबहार बंदरगाह में हमारा निवेश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण में भरत सरकार का समर्थन करते है। पीएम ने कहा कि भारत के द्वारा किए गए निवेश और न्यू परियोजनाओं को लेकर मान्यताओं को लेकर अपने उद्यमियों को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाने की काम करना है। दरअसल इसके पहले एससीओ स्टार्ट अप फोरम औऱ एससीओ यंग साइंटिस्ट कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। पीएम मोदी ने आगे कहा कि एससीओ देशों से भारत अपनी गतिविधियों पर समर्थन चाहता है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अंतर-विश्वास के लिए जितनी महत्वपूर्ण है उतना ही हमारे युवाओं के भविष्य के लिए उपयोगी है। दरअसल विगत वर्षों में भारत में तकनीकी सिस्टम में काफी बदलाव आया है। जिसमें फाइनेंशियल इंक्लूजन बढ़ाने के लिए यूपीआई औऱ रुपए कार्ड या फिर कोविड को लेकर एप्स आदि के साथ कई डिजिटल प्लेट फॉर्म का उदबोधन किया है। पीएम ने कहा कि कट्टरपंथ के खिलाफ सभी देशों को मिलकर खाका तैयार करना चाहिए। भारत सहित एससीओ में हर देश में इस्लाम से संबंधित उदारवादी, सहिष्णु और समावेशी संगठन और परंपराएं हैं। एससीओ को इन संगठनों के बीच एक मजबूत नेटवर्क बनाने के लिए काम करना चाहिए। इसके अलावा मोदी ने इतिहास को समझाते हुए कहा कि मध्य एशिया का क्षेत्र मॉडरेट औऱ प्रोग्रेसिव कल्चर औऱ वैल्यूज का गढ़ रहा है। साथ ही सांस्कृतिक औऱ पारंपरिक सभ्यताएं रही है। दरअसल आतंकी पैमाना बढ़ने का मुख्य कारण शांति भंग औऱ देशों का रणनीति के आधार पर विभाजन बना है। हालिया अफगानिस्तान के माहौल को देखते हुए सभी देशों को एकजुटता का परिचय देने की जरूरत है ताकि आतंकवाद किसी देश की रीड की हड्डी न बन पाए। वहीं बता दें कि एससीओ की 20वीं वर्षगांठ भी आज है। पीएम ने सभी नए मित्रों का स्वागत किया। शंघाई सहयोग संगठन की वार्षिक शिखर बैठक में भारत आतंकवाद के अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा खासकर अफगानिस्तान के राजनीतिक हालात, कोरोना महामारी का असर, एससीओ के सदस्यों की संख्या बढ़ाने और बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा करेगा।

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